Day 18: कर्तव्य, यज्ञ और सात्त्विक त्याग (3.14, 18.48, 18.9) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक में 3 बड़ी बातें जुड़ी हैं:
भगवान को चराचर जगत का पिता, गुरु और अप्रतिम मानने की भावना (11.43)
विभूतियों में शंकर, कुबेर, अग्नि और मेरु रूप में भगवान की झलक (10.23)
सहज स्वभाव वाले कर्म को, दोषों के बावजूद, न छोड़ने की प्रेरणा (18.48)
यज्ञ–कर्म–वृष्टि–अन्न–भूत—इस पूरे चक्र से कर्तव्य और संसार की कड़ी (3.14)
सत्त्विक त्याग: आसक्ति और फल छोड़कर केवल “कर्तव्य भाव” से कर्म करना (18.9)
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“आज का मेरा श्लोक = (11.43/10.23/18.48/3.14/18.9)”
और “आज मैं किस काम में ‘सहज कर्म + सात्त्विक त्याग’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?”
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