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Showing posts with the label गीता का सार (Geeta Ka Saar) अध्याय 17

Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 28 | अश्रद्धा का परिणाम: बिना श्रद्धा किए यज्ञ, दान और तप व्यर्थ

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 27 | सत् स्थिति: यज्ञ, तप और दान की श्रेष्ठता और परमात्मा के लिए कर्म

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 26 | सत् शब्द का महत्व: श्रेष्ठ कर्मों में परमात्मा का नाम

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 25 | तत् मंत्र के साथ मोक्ष साधना: निःस्वार्थ यज्ञ, तप और दान

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 24 | ॐ का उच्चारण: यज्ञ, दान और तप की शुरुआत का मूल सूत्र

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 23 | ॐ तत् सत्: ब्रह्म के तीन दिव्य नाम और वैदिक कर्म

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 22 | तामस दान: अनुचित समय, स्थान और पात्र को दिया गया दान

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 21 | राजस दान: फल की आशा से किया गया दान

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 20 | सात्त्विक दान: निःस्वार्थ, योग्य व्यक्ति को सही समय पर दान

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 19 | तामस तप: मूढ़ता से स्वयं और दूसरों को कष्ट देना

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 18 | राजस तप: सत्कार, मान और पूजाके लिए किया गया तप

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 17 | सात्त्विक तप: परम श्रद्धा से किया गया तप #jagatkasaar

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 16 | मानसिक तप: मनःप्रसाद, सौम्यत्व और आत्मनियंत्रण

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 15 | वाणी-सम्बंधी तप: सच्चाई, प्रियता और स्वाध्याय

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 14 | शारीरिक तप: देवद्विजगुरु-पूजन, शौच और ब्रह्मचर्य

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 13 | तामस यज्ञ: विधि विपरीत और श्रद्धा विहीन यज्ञ

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Geeta Ka Saar Series | अध्याय 17 श्लोक 12 | राजस यज्ञ: फल की इच्छा और दम्भ से किया गया यज्ञ

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Geeta Wisdom Series | अध्याय 17 श्लोक 11 गहरा अर्थ | निःस्वार्थ सात्त्विक यज्ञ का रहस्य | Har Har Geeta हर घर गीता

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अध्याय 17 श्लोक 9-10 | भगवद गीता हिंदी | राजस-तामस आहार के लक्षण #jagatkasaar

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अध्याय 17 श्लोक 9 | भगवद गीता हिंदी | राजस आहार, दुःख-शोक-रोग #jagatkasaar

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