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Day 47: गुणातीत, आसुरी गर्व और समचित्तता | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series (with Quiz)

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  आज के 5 श्लोक: तीनों गुणों से परे देही —जन्म–मृत्यु–जरा–दुःख से मुक्त होकर अमृत को प्राप्त होता है (14.20) “मैं आढ़्य, अभिजनवान, मेरे जैसा कौन?” —अज्ञान से मोहित आसुरी घमण्ड (16.15) द्वेषी, क्रूर, नराधम —बार–बार आसुरी योनियों में गिरते हैं (16.19) पुत्र–दार–गृहादि में असक्ति, इष्ट–अनिष्ट में समचित्त —ज्ञान के लक्षण (13.9) रागी, फललोलुप, हिंसात्मक, हर्ष–शोकान्वित कर्ता —राजस कर्ता (18.27) CTA: कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (14.20/16.15/16.19/13.9/18.27)" और "आज मैं किस जगह ‘समचित्तता + आसुरी गर्व से सावधानी + गुणातीत दृष्टि’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"

Day 46: एकाग्र चित्त, आत्मविशुद्धि और आसुरी भाव | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series (with Quiz)

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आज के 5 श्लोक: तत्र एकाग्रं मनः कृत्वा —चित्त–इन्द्रिय क्रियाओं को वश में रखकर, आसन पर बैठकर आत्मविशुद्धि के लिए योगाभ्यास (6.12) ब्राह्मण–क्षत्रिय–वैश्‍य–शूद्र कर्म —स्वभावप्रभव गुणों से विभक्त (18.41) काम का अड्डा —इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि – इन्हीं के द्वारा ज्ञान को ढँककर देही को मोहित करता है (3.40) यत्र उपरमते चित्तम् —योगसेवया निरुद्ध चित्त आत्मा में संतुष्ट होता है (6.20 के भाव से जुड़ाव) दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, पारुष्य, अज्ञान —आसुरी सम्पदा के लक्षण (16.4) CTA: कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (6.12/18.41/3.40/6.20/16.4)" और "आज मैं किस जगह ‘एकाग्र चित्त + स्वभाव-धर्म + आसुरी भाव से सावधानी’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"

Day 45: क्षेत्रज्ञ, महाकाल और स्वधर्म | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक: अक्षरों में अकार, काल में अक्षय काल —भगवान अपनी विभूतियाँ बताते हैं (10.33) यह शरीर क्षेत्र है —और जो इसे जानता है, वही क्षेत्रज्ञ है (13.1) जो मुझे अजन्मा, अनादि, लोकमहेश्वर जानता है —वह मनुष्यों में असम्मूढ़ होकर पापों से मुक्त होता है (10.3) स्वधर्म देखकर विचलित मत हो —क्षत्रिय के लिए धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर कुछ नहीं (2.31) ​ अर्जुन की देह-प्रतिक्रिया —अंग शिथिल, मुख सूखा, शरीर काँपा, रोमांच हुआ (1.29) ​ 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok CTA: कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (10.33/13.1/10.3/2.31/1.29)" और "आज मैं किस जगह ‘मैं शरीर नहीं, क्षेत्रज्ञ हूँ’ या ‘स्वधर्म से नहीं डगमगाऊँगा’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?" #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #KshetraKshetrajna #Swadharma #Day45

Day 44: मृत्यु-चक्र, पाप-प्रेरणा और अनन्य भक्ति

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  आज के 5 श्लोक (Script + Quiz सहित तैयार) 2.27 – जन्मे की मृत्यु, मरे का जन्म निश्चित 3.36 – “मैं न भी चाहूँ तो पाप क्यों कर बैठता हूँ?” 8.22 – समस्त जगत से व्याप्त परम पुरुष, जो केवल अनन्य भक्ति से मिलता है 10.5 – अहिंसा, समता, तुष्टि, यश–अयश—सब भाव भगवान से ही उत्पन्न 2.46 – जैसे बड़े सरोवर से मिलने पर छोटे कुएँ की ज़रूरत कम हो जाती है

Day 43: भय, स्पर्श और इन्द्रिय-नाव | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series (with Quiz)

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  आज के 5 श्लोक: दुर्योधन का पहला कदम —पाण्डवों की व्यूहरचित सेना देखकर द्रोणाचार्य के पास भागना (1.2) “तीन लोक भी नहीं चाहिए” —स्वजन-वध से अर्जुन का हृदय हिल जाना (1.35) शीतोष्ण-सुखदुःख = मात्रास्पर्श —आगमापायि, अनित्य, तान् तितिक्षस्व (2.14) कामात्मा, स्वर्गपरा, पुष्पित वाच —भोग-ऐश्वर्य की चकाचौंध में फँसा मन (2.43) इन्द्रिय-नाव और मन-वायु —एक इन्द्रिय के पीछे भागता मन पूरी प्रज्ञा को उड़ा ले जाता है (2.67) CTA: कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (1.2/1.35/2.14/2.43/2.67)" और "आज मैं किस जगह ‘तितिक्षा + इन्द्रिय-संयम’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?" #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #FearToDharma #IndriyaSanyam #Day43