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Day 20: परा प्रकृति, यज्ञ और ‘सब कुछ वही’ (7.5, 9.16) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक में तीन मुख्य सूत्र जुड़ते हैं: अपरा जड़ प्रकृति के बाद भगवान की  जीवरूप परा (चेतन) प्रकृति  (7.5) ​ अलग‑अलग प्रकार के यज्ञ—देव यज्ञ से लेकर ब्रह्माग्नि में आत्मयज्ञ तक (4.25) ​ यज्ञ के माध्यम से  देव और मनुष्य—परस्पर उन्नति  का सिद्धान्त (3.11) ​ अर्जुन का पूर्ण समर्पण—“आप जो कहते हैं, सब सत्य है; आपके लीलामय स्वरूप को देव‑दानव भी नहीं जानते” (10.14) ​ भगवान का उद्घोष—“क्रतु, यज्ञ, स्वधा, औषधि, मन्त्र, घृत, अग्नि, हवन—सब मैं ही हूँ” (9.16) ​ 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok CTA (Description/Pinned): कमेंट में लिखिए— “आज का मेरा श्लोक = (7.5/4.25/3.11/10.14/9.16)” और “आज मैं किस काम/पूजा में ‘भगवान ही कर्ता हैं’ ऐसा भाव रखूँगा/रखूँगी?” #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #Prakriti #Yagya #Bhakti #Day20

20 February 2026 राशिफल पंचांग | आज का पंचांग आज का राशिफल फाल्गुन शुक्ल तृतीया उत्तराभाद्रपद नक्षत्र #AajKaRashifal #AajKaPanchang

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20 February 2026 राशिफल पंचांग आज का पंचांग आज का राशिफल। फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की   तृतीया , शुक्रवार। तिथि   तृतीया   14:37:56 तक, फिर चतुर्थी। नक्षत्र   उत्तराभाद्रपद   20:06:35 तक। योग   साध्य   18:22:18 तक। करण   गर   14:37:56 तक, फिर   वणिज   25:51:02 तक। चंद्र   मीन   में, सूर्य   कुंभ   में; लग्न   मकर । उत्तराभाद्रपद नक्षत्र स्थिरता, गहरी समझ और आध्यात्मिक बल देता है; साध्य योग से काम “पूरा होकर” आगे बढ़ते हैं—आज शांति से, लगातार प्रयास करने पर अच्छे परिणाम मिलेंगे। Tags 20 February 2026 राशिफल पंचांग आज का पंचांग आज का राशिफल फाल्गुन शुक्ल तृतीया उत्तराभाद्रपद नक्षत्र साध्य योग शुक्रवार राशिफल #AajKaRashifal #AajKaPanchang

Day 19: मेरी अष्टधा प्रकृति (7.04) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक: भगवान की  अष्टधा (आठ भागों वाली) भिन्ना प्रकृति —पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि, अहंकार (7.04) ​ युद्धभूमि में अर्जुन जिन बन्धुओं को देखकर व्याकुल होते हैं—गुरुजन, पिता-तुल्य, पुत्र, पितामह, मामा, ससुर, पौत्र, साले, सम्बन्धी (1.34) ​ विभूति योग—नागों में अनन्त, जलचरों में वरुण, पितरों में अर्यमा, संयम करने वालों में यम (10.29) ​ आत्मा को नित्य जन्मने/नित्य मरने वाला मान लो, तब भी  शोक उचित नहीं  (2.26) ​ पहले सांख्य (ज्ञान) की बुद्धि, फिर कर्मयोग—जिस बुद्धि से  कर्मबंधन कटता है  (2.39) ​ 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok CTA (Pinned/Description): कमेंट में लिखिए: “आज का मेरा श्लोक = (7.04/1.34/10.29/2.26/2.39)” और “आज मैं किस चीज़ में ‘अहंकार’ कम करूँगा/करूँगी—वाणी, काम, या रिश्ते?” #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #Prakriti #Ahamkar #Karmayoga #Day19 ​