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Day 88 | 5 Shlok Per Day | संशय नाश, बुद्धियोग कृपा, अर्जुन का पश्चाताप | हर हर गीता, हर घर गीता | जगत का सार

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5 Shlok Per Day   के Day 88 में   जगत का सार   सुनें: संशय छेदन का call (4.42), मेरे मत को अभ्यसूयन्तों का नाश (3.32), ब्रह्मकर्म स्वभावज (18.42), अव्यक्त पुरुष (8.20), और जीवात्मा का शरीर ग्रहण (15.8)।   Interactive   format में   हर घर गीता   mission। वीडियो शुरू करने से पहले: Channel को  Subscribe  कर लीजिए। Video को  Like  कर दीजिए। इसे  Share  कीजिए  हर घर गीता  के लिए। Comment में:  "मेरा श्लोक =  "   "Jagat Ka Saar =  " Tags #Day88 #5ShlokPerDay #BhagavadGita #गीता #संशयनाश #बुद्धियोग #हरहरगीता #हरघरगीता #जगतकासार #GitaInHindi

Day 87 | 5 Shlok Per Day | संशय-नाश, ब्राह्मण-कर्म, अव्यक्त पुरुष | हर हर गीता, हर घर गीता | जगत का सार

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आज के 5 श्लोक गीता के   सबसे crucial turning points   को touch करते हैं—संशय का अंतिम नाश, दोषारोपण करने वालों का पतन, ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म, अव्यक्त पुरुष का सनातन रहस्य, और जीवात्मा का शरीर-त्याग-ग्रहण। 4.42 का श्लोक अर्जुन को अंतिम nudge देता है। Description Day 87 में  हर हर गीता, हर घर गीता  mission के तहत जगत का सार सुनें: संशय छेदन का call (4.42), मेरे मत को दोषारोपण करने वालों का नाश (3.32), ब्राह्मण के शम-दम-तप-शौच-ज्ञान कर्म (18.42), नश्यत्सु भूतेषु न विनश्यति अव्यक्त पुरुष (8.20), और जीवात्मा का वायु-गन्ध जैसे शरीर ग्रहण (15.8)।  Interactive format  में  5 Shlok Per Day । वीडियो शुरू करने से पहले: Channel को  Subscribe  कर लीजिए। Video को  Like  कर दीजिए। इसे  Share  कीजिए किसी  हर घर गीता  के लिए। Comment में:  "मेरा श्लोक =  "  और  "Jagat Ka Saar today =  " Tags #Day87 #5ShlokPerDay #BhagavadGita #गीता #संशयनाश #ब्राह्मणकर्म #अव्यक्तपुरुष #हरहरगीता #हरघरगीता #जगतकासार #G...

Day 86 | 5 Shlok Per Day | तमोगुण, मोह-नाश, शरणागति | हर हर गीता, हर घर गीता |जगत का सार#jagatkasaar

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  आज के श्लोक तमोगुण के लक्षण, मोह के नाश, शरणागति, और भगवान को यज्ञ-तपों का भोक्ता तथा सर्वभूतों का सुहृद् जानने से मिलने वाली शान्ति को दिखाते हैं। यह episode Jagat Ka Saar को mission-style devotional format में पेश करता है।## **'जगत का सार' चैनल पर आपका स्वागत है!** यह एक ऐसा स्थान है जहाँ आपको प्रतिदिन भगवद गीता का प्रेरणादायक सार, श्रीकृष्ण की ज्ञानवाणी और भारतीय आध्यात्मिकता की सच्ची रोशनी मिलेगी। ### **इस चैनल पर क्या है?** * **दैनिक गीता ज्ञान:** रोज़ 1 मिनट के शॉट्स और पूरे वीडियो के माध्यम से गीता के श्लोकों का सरल अर्थ जानें, अपनी रोज़मर्रा की समस्याओं का समाधान पाएँ और जीवन में अपनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्राप्त करें। * **ज्ञान के साथ जीतें:** हमारे व्यावहारिक Q&A और Kahoot-शैली की क्विज़ में भाग लें और मज़ेदार उपहार, कैशबैक और शाउटआउट जीतें! * **सच्चा मोटिवेशन:** श्रीकृष्ण के उपदेशों, सनातन धर्म, रामायण, महाभारत और भारतीय वेदांत के समन्वय से जीवन की नई दिशा पाएँ। * **पवित्र स्थलों के दर्शन:** मोटी डूंगरी (जयपुर), सालासर बालाजी, कैलादेवी, महाकाल, श्रीन...

Day 85 Script | संशय का नाश, सन्न्यास-योगी एकता, और विश्वरूप का अनादि तेज

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आज के श्लोक गीता के मूल प्रश्नों का उत्तर देते हैं—संशयात्मा क्यों विनष्ट होता है, सच्चा संन्यासी-योगी कौन है, भगवान कौन-कौन से रूपों में प्रकट होते हैं, और विश्वरूप का अनादि-अनंत तेज कैसा है। यह episode साधना के व्यावहारिक पक्ष को स्पष्ट करता है। Description Day 85 में श्रीकृष्ण अर्जुन के विषाद पर हँसते हुए बोलते हैं (2.10), संशयात्मा के लिए न यह लोक न परलोक न सुख (4.40), निष्काम कर्म करने वाला ही सच्चा संन्यासी-योगी (6.1), भगवान वृष्णियों में वासुदेव और पांडवों में धनंजय (10.37), और विश्वरूप का अनादि-अनंत-चन्द्र-सूर्य नेत्र स्वरूप (11.19)। वीडियो शुरू करने से पहले: Channel को  Subscribe  कर लीजिए। Video को  Like  कर दीजिए। इसे  Share  कीजिए किसी गीता प्रेमी के साथ। Comment में लिखिए:  "मेरा श्लोक = [number]"  और  "मेरा review = [word]" Tags #Day85 #BhagavadGita #GitaShlok #गीता #संशयविनाश #सन्न्यासयोगी #विश्वरूप #हरहरगीता #हरघरगीता #GitaInHindi #DailyShlok

Day 84 Script | मृत्यु, ज्ञानाग्नि, ब्रह्मभाव और विश्वरूप का अंतहीन तेज

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आज के श्लोक जीवन के चार बड़े रहस्य खोलते हैं—भगवान का मृत्यु और उद्भव के रूप में होना, ब्रह्मभूत अवस्था का शान्त लक्षण, ज्ञानाग्नि का कर्म-भस्मीकरण, कामना-प्रधान अशुचि आचरण, और विश्वरूप का अनन्त विस्तार। 10.34 विशेष रूप से बताता है कि भगवान मृत्यु भी हैं और उत्पत्ति भी, जबकि 18.54 और 4.37 मुक्ति का आंतरिक मार्ग दिखाते हैं। Description Day 84 में आप सुनेंगे कि भगवान मृत्यु और भविष्यत्-उत्पत्ति दोनों के रूप हैं, ब्रह्मभूत योगी न शोक करता न इच्छा करता है, ज्ञानाग्नि सारे कर्म-बंधनों को भस्म कर देती है, कामोपभोगपरायण लोग असंख्य चिन्ताओं में फँसे रहते हैं, और विश्वरूप का न अंत दिखता है न मध्य न आदि। ये श्लोक भय, वैराग्य, ज्ञान और ब्रह्मदर्शन का गहरा संगम हैं। वीडियो शुरू करने से पहले: Channel ko  Subscribe  कर लीजिए। Video ko  Like  कर दीजिए। इसे  Share  कीजिए किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जिसे गीता की गहराई पसंद है। Comment में लिखिए:  “मेरा review:  ” और एक line:  “आज मैंने मृत्यु / ज्ञान / ब्रह्मभाव में क्या समझा” Tags #Day84 #BhagavadGita #GitaShlok...