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Day 41: स्वधर्म, संयम और योगयुक्त चित्त | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक: धर्म्य संग्राम से भागना —स्वधर्म और कीर्ति खोकर पाप प्राप्त होगा (2.33) इन्द्रिय-संयम यज्ञ —कुछ योगी इन्द्रियों को संयमाग्नि में, कुछ विषयों को इन्द्रियाग्नि में हवन करते हैं (4.26) आहार, यज्ञ, तप, दान—तीनों प्रकार के  होते हैं (17.7) प्रकृति के अनुसार ही चेष्टा —ज्ञानवान भी अपने स्वभाव के अनुसार चलता है (3.33) विनियत चित्त आत्मा में स्थित —कामनारहित वही योगयुक्त कहलाता है (6.18) 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok CTA: कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (2.33/4.26/17.7/3.33/6.18)" और "आज मैं किस जगह अपने स्वधर्म, संयम या चित्त-नियमन का अभ्यास करूँगा/करूँगी?" #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #Swadharma #IndriyaSanyam #Day41

13 March 2026 राशिफल पंचांग | आज का पंचांग आज का राशिफल चैत्र कृष्ण दशमी पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र व्यतीपात योग #AajKaPanchang #AajKaRashifal

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13 March 2026 राशिफल पंचांग आज का पंचांग आज का राशिफल। आज   दशमी ,   कृष्ण पक्ष , मास   चैत्र । तिथि   दशमी   पूरे दिन चल रही है, स्क्रीन पर “अहोरात्र” दिख रहा है। नक्षत्र   पूर्वाषाढ़ा   27:02:07 तक। योग   व्यतीपात   10:30:31 तक। करण   वणिज   19:23:29 तक। वार   शुक्रवार । चंद्र   धनु   में, सूर्य   कुंभ   में; लग्न   कुंभ , बुध वक्री   कुंभ , शुक्र   मीन , मंगल   कुंभ , बृहस्पति   मिथुन , शनि   मीन , राहु   कुंभ , केतु   सिंह   में दिखाई दे रहे हैं। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र “अपराजित” ऊर्जा, confidence, अभिव्यक्ति और belief देता है, लेकिन व्यतीपात योग सुबह तक अचानक मोड़ और असंतुलन ला सकता है—इसलिए conviction रखें, पर जल्दबाज़ी नहीं। Tags 13 March 2026 राशिफल पंचांग ​ आज का पंचांग ​ आज का राशिफल ​ चैत्र कृष्ण दशमी ​ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र ​ व्यतीपात योग ​ शुक्रवार राशिफल ​ #AajKaPanchang #AajKaRashifal

Day 40: श्रद्धा, शिष्यभाव और ‘तत्’ भावना | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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आज के 5 श्लोक: सत्त्वानुरूप श्रद्धा —मनुष्य श्रद्धामय है, जैसी श्रद्धा, वैसा ही वह स्वयं (17.3) उत्तरायण मार्ग —अग्नि, ज्योति, शुक्ल, उत्तरायण मार्ग से ब्रह्मविदों की गति (8.24) कार्पण्यदोष + शिष्यभाव —“धर्मसम्मूढचेताः… शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्” (2.7) दो मार्ग: आवृत्ति / अनावृत्ति —किस काल में गये योगी लौटते हैं, किसमें नहीं (8.23) ‘तत्’ भावना से यज्ञ-तप-दान —फल-संघर्ष छोड़कर केवल परमात्मा के नाम से (17.25) 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok CTA: कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (17.3/8.24/2.7/8.23/17.25)" और "आज मैं किस जगह ‘शिष्यभाव + तत् भावना’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?" #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #Shraddha #Shishyabhav #TatNam #Day40