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Day 30: प्रकृति, विभूति और निष्काम शान्ति | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक: अर्जुन का संकल्प— “दुर्बुद्धि धार्तराष्ट्र के हितचाहक योद्धाओं को देखूँ”  (1.23) “मैं युद्ध नहीं करूँगा” —अहंकार-जन्य मिथ्या निश्चय, प्रकृति फिर भी युद्ध में लगाती है (18.59) जो भी  विभूति, श्री, शक्ति  दिखे—उसे मेरे तेज के अंश की अभिव्यक्ति जानो (10.41) बृहत्साम, गायत्री, मार्गशीर्ष, वसन्त —मेरी ही विशिष्ट अभिव्यक्तियाँ (10.35) ​ युक्त कर्मयोगी  फल त्यागकर नैष्ठिकी शान्ति पाए;  अयुक्त  फलासक्ति से बँधे (5.12) ​ 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka ​ 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok ​ CTA: कमेंट में लिखिए—“आज का मेरा श्लोक = (1.23/18.59/10.41/10.35/5.12)” और “आज मैं किस ‘फल’ को छोड़कर केवल कर्तव्यभाव से काम करूँगा/करूँगी?” ​ #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #VibhutiYoga #Karmayog #Day30

02 March 2026 राशिफल पंचांग | आज का पंचांग आज का राशिफल फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी आश्लेषा नक्षत्र अतिगण्ड योग #AajKaRashifal #AajKaPanchang

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  02 March 2026 राशिफल पंचांग आज का पंचांग आज का राशिफल। फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की   चतुर्दशी , सोमवार। तिथि   चतुर्दशी   17:55:12 तक। नक्षत्र   आश्लेषा   07:50:41 तक। योग   अतिगण्ड   12:18:11 तक। करण:   वणिज   07:57:04 तक, फिर   विष्टि/भद्रा   17:55:12 तक, उसके बाद   शकुनि   29:27:35 (अगले दिन भोर तक)। चंद्र   सिंह   में 07:50:41 तक, फिर   कन्या   में; सूर्य   कुंभ   में। लग्न   कुंभ   दिख रहा है; ग्रह-स्थिति में सूर्य, बुध (वक्री), मंगल, राहु   कुंभ   में; शुक्र, शनि   मीन   में; चंद्र   कर्क   (चार्ट में) दिख रहा है; बृहस्पति   मिथुन , केतु   सिंह   में। आज आश्लेषा–अतिगण्ड का प्रभाव सुबह तक तीखा हो सकता है—इसलिए भावनात्मक उलझन/गलतफहमी से बचकर, दोपहर बाद शांत होकर काम करें। Tags 02 March 2026 राशिफल पंचांग आज का पंचांग आज का राशिफल फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी आश्लेषा नक्षत्र अतिगण्ड योग सोमवार राशिफल #AajKaRashifal #AajKaPanchang

Day 29: वासुदेवः सर्वम् इति | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक: बहूनां जन्मनाम् अन्ते —“वासुदेवः सर्वम् इति” कहने वाला महात्मा सुदुर्लभ (7.19) ​ शास्त्रविधि छोड़कर मनमानी —न सिद्धि, न सुख, न परमगति (16.23) ​ कर्मफल के लोभी —देवताओं की पूजा से शीघ्र कर्मजा सिद्धि (4.12) ​ कल्पक्षय और कल्पादि —सब भूत मेरी प्रकृति में लीन होकर फिर रचे जाते हैं (9.7) ​ जिसको पूजो, वही मिलो —देवव्रत देवों को, पितृव्रत पितरों को, मद्याजिनो माम् (9.25) ​ 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka ​ 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok ​ CTA: कमेंट में लिखिए—“आज का मेरा श्लोक = (7.19/16.23/4.12/9.7/9.25)” और “आज मैं किस जगह ‘वासुदेवः सर्वम्’ की दृष्टि से देखने का अभ्यास करूँगा/करूँगी?” ​ #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #VasudevaSarvam #ShastraVidhि #Day29