Day 29: वासुदेवः सर्वम् इति | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक: बहूनां जन्मनाम् अन्ते —“वासुदेवः सर्वम् इति” कहने वाला महात्मा सुदुर्लभ (7.19) शास्त्रविधि छोड़कर मनमानी —न सिद्धि, न सुख, न परमगति (16.23) कर्मफल के लोभी —देवताओं की पूजा से शीघ्र कर्मजा सिद्धि (4.12) कल्पक्षय और कल्पादि —सब भूत मेरी प्रकृति में लीन होकर फिर रचे जाते हैं (9.7) जिसको पूजो, वही मिलो —देवव्रत देवों को, पितृव्रत पितरों को, मद्याजिनो माम् (9.25) 🌐 Ramshalaka : https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka 🌐 Mood-based Geeta Shlok : https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok CTA: कमेंट में लिखिए—“आज का मेरा श्लोक = (7.19/16.23/4.12/9.7/9.25)” और “आज मैं किस जगह ‘वासुदेवः सर्वम्’ की दृष्टि से देखने का अभ्यास करूँगा/करूँगी?” #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #VasudevaSarvam #ShastraVidhि #Day29