Day 87 | 5 Shlok Per Day | संशय-नाश, ब्राह्मण-कर्म, अव्यक्त पुरुष | हर हर गीता, हर घर गीता | जगत का सार
आज के 5 श्लोक गीता के सबसे crucial turning points को touch करते हैं—संशय का अंतिम नाश, दोषारोपण करने वालों का पतन, ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म, अव्यक्त पुरुष का सनातन रहस्य, और जीवात्मा का शरीर-त्याग-ग्रहण। 4.42 का श्लोक अर्जुन को अंतिम nudge देता है। Description Day 87 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के तहत जगत का सार सुनें: संशय छेदन का call (4.42), मेरे मत को दोषारोपण करने वालों का नाश (3.32), ब्राह्मण के शम-दम-तप-शौच-ज्ञान कर्म (18.42), नश्यत्सु भूतेषु न विनश्यति अव्यक्त पुरुष (8.20), और जीवात्मा का वायु-गन्ध जैसे शरीर ग्रहण (15.8)। Interactive format में 5 Shlok Per Day । वीडियो शुरू करने से पहले: Channel को Subscribe कर लीजिए। Video को Like कर दीजिए। इसे Share कीजिए किसी हर घर गीता के लिए। Comment में: "मेरा श्लोक = " और "Jagat Ka Saar today = " Tags #Day87 #5ShlokPerDay #BhagavadGita #गीता #संशयनाश #ब्राह्मणकर्म #अव्यक्तपुरुष #हरहरगीता #हरघरगीता #जगतकासार #G...