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Day 74: क्षेत्र-ज्ञान, भगवान के 12 स्वरूप और ज्ञान-निष्ठा | हर हर गीता, हर घर गीता!

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  आज के Day 74 में हम जानेंगे   क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का भेद , भगवान के अनेक दिव्य स्वरूप, अर्जुन के गहरे प्रश्न, विश्वरूप के सामने देवताओं और ऋषियों की स्तुति, और ज्ञानयोग की परा निष्ठा। 13.34 में कहा गया है कि जो ज्ञानचक्षु से क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का भेद और प्रकृति से मुक्ति का तत्त्व जान लेते हैं, वे परम को प्राप्त होते हैं। 9.18 में भगवान स्वयं को गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, शरण, सुहृत्, प्रभव, प्रलय, स्थान, निधान और अव्यय बीज बताते हैं। 8.1 में अर्जुन ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत और अधिदैव के बारे में प्रश्न पूछते हैं, और 11.21 में देवता, महर्षि और सिद्ध भगवान की स्तुति करते दिखाई देते हैं। वीडियो शुरू करने से पहले: Channel ko  Subscribe  कर लीजिए। Video ko  Like  ज़रूर कीजिए। Isko kisi ek Gita-premi ke saath  Share  कीजिए। Comment me likhiye:  “मेरा review:  ” Tags #Day74 #BhagavadGita #GitaShlok #गीता #क्षेत्रक्षेत्रज्ञ #ज्ञानयोग #हरहरगीता #हरघरगीता #GitaInHindi #DailyShlok

Day 73: चार प्रकार के भक्त, दिव्य रूप और चंचल मन | हर हर गीता, हर घर गीता!

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  आज के Day 73 में 5 बहुत ही शक्तिशाली श्लोक हैं— चार प्रकार के भक्त ,   अर्जुन को दिखाया गया परम ऐश्वर्ययुक्त रूप ,   मन की चंचलता का ईमानदार स्वीकार ,   भाव-समन्वित बुद्धिमान की भक्ति , और   अहंकार, दर्प, काम-क्रोध-परिग्रह से मुक्त होकर ब्रह्मभूत होने की योग्यता । 7.16 में भगवान कहते हैं कि आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी—ये चार प्रकार के सुकृती भक्त उन्हें भजते हैं। यह episode उन साधकों के लिए है जो अपनी भक्ति, मन और साधना को समझदारी से देखना चाहते हैं। 11.9 में संजय कहते हैं कि भगवान ने अर्जुन को परम ऐश्वर्ययुक्त दिव्य रूप दिखाया; 6.34 में अर्जुन मन की चंचलता को वायु की तरह पकड़ से बाहर बताता है; 10.8 में बुद्धिमान भक्त भगवान को सबका कारण समझकर भजते हैं; और 18.53 बताता है कि अहंकार, दर्प, काम, क्रोध और परिग्रह का त्याग करके शान्त पुरुष ब्रह्मभूयाय पात्र बनता है। इस वीडियो में आपको मिलेगा: SEO-friendly title + strong hook Original 5 श्लोक with pronunciation, शब्दार्थ, भावार्थ हर श्लोक के बाद छोटा interactive pause पिछली video पर based quiz with 4 options ...

Day 72: अन्तर्यामी ईश्वर, अव्यक्त प्रकृति और पुरुषोत्तम-बोध | हर हर गीता, हर घर गीता!

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आज के Day 72 में 5 अत्यंत गूढ़ श्लोक हैं— अन्तर्यामी ईश्वर   जो सब प्राणियों के हृदय में स्थित है,   सत्त्व-रजस-तमस   से उत्पन्न भावों की वास्तविक प्रकृति,   अव्यक्त-अवस्था   की दृष्टि से शोक-रहित विवेक,   पुरुषोत्तम का आत्म-ज्ञान , और   क्लैब्य त्यागकर उठ खड़े होने   की अर्जुन को दी गई प्रेरणा। 18.61 बताता है कि ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में स्थित होकर उन्हें उनकी माया के अनुसार यन्त्रारूढ़ जीवों की तरह भ्रमण कराता है। यह episode उन साधकों के लिए है जो control, surrender और inner responsibility को गहराई से समझना चाहते हैं। 7.12 में भगवान स्पष्ट करते हैं कि सात्त्विक, राजस और तामस भाव मुझसे ही उत्पन्न प्रतीत होते हैं, हालांकि वास्तव में भगवान उनमें नहीं और वे भगवान में नहीं हैं। 2.28 जीवन और मृत्यु को अव्यक्त-व्यक्त-अव्यक्त की दृष्टि से देखने को कहता है; 10.15 में अर्जुन स्वीकार करता है कि भगवान को वे स्वयं ही अपने से जानते हैं; और 2.3 में भगवान अर्जुन को हृदय की दुर्बलता छोड़कर उठने को कहते हैं। इस वीडियो में आपको मिलेगा: SEO-friendly title + s...

Day 71: दिव्य दृष्टि, देहान्तरण और योगारूढ़ शांति | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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आज के Day 71 में 5 अत्यंत महत्वपूर्ण श्लोक हैं— दिव्य चक्षु   के बिना भगवान के ऐश्वर्य-दर्शन की असंभवता,   पुराने वस्त्रों की तरह देह-परिवर्तन ,   नैष्कर्म्यसिद्धि   की सर्वोच्च स्थिति,   योगारूढ़ होने का मार्ग , और   भगवान का सृष्टि, विद्या तथा वाद में सर्वव्यापक स्वरूप । 11.8 बताता है कि सामान्य प्राकृत नेत्रों से भगवान के योगैश्वर्य का दर्शन संभव नहीं, इसलिए दिव्य दृष्टि आवश्यक है। यह episode उन साधकों के लिए है जो form से beyond जाकर vision, detachment और inner steadiness को समझना चाहते हैं। 2.22 देहान्तरण को पुराने वस्त्र बदलने की उपमा से समझाता है; 18.49 बताता है कि सर्वत्र आसक्ति रहित, स्पृहारहित और जितेन्द्रिय पुरुष नैष्कर्म्यसिद्धि प्राप्त करता है; 6.3 कर्म और शम को योग-मार्ग के दो चरणों की तरह रखता है; और 10.32 भगवान को सृष्टियों का आदि, अन्त, मध्य, अध्यात्मविद्या और तत्त्वनिर्णय का वाद बताता है। इस वीडियो में आपको मिलेगा: SEO-friendly title + strong hook Original 5 श्लोक with pronunciation, शब्दार्थ, भावार्थ हर श्लोक के बाद छोटा interactive pause...