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06 March 2026 राशिफल पंचांग | आज का पंचांग आज का राशिफल चैत्र कृष्ण तृतीया हस्त नक्षत्र गण्ड योग #AajKaPanchang #AajKaRashifal

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  06 March 2026 राशिफल पंचांग आज का पंचांग आज का राशिफल। आज   तृतीया ,   कृष्ण पक्ष , मास   चैत्र । तिथि   तृतीया   17:52:46 तक। नक्षत्र   हस्त   09:28:54 तक। योग   गण्ड   07:04:31 तक। करण   वणिज   07:?? (स्क्रीन पर दिख रहा है) और आगे   विष्टि/भद्रा   17:52:46 तक। वार   शुक्रवार । चंद्र   कन्या   में 22:17:41 तक, उसके बाद   तुला   में प्रवेश; सूर्य   कुंभ   में। आज सुबह 07:04 तक गण्ड योग में सावधानी रखें, फिर दिन practical और productive रहेगा—कन्या चंद्र के कारण काम, editing, health routine और “हाथ से काम” (हस्त नक्षत्र) वाली चीज़ों में सफलता मिलेगी। ​ Tags 06 March 2026 राशिफल पंचांग ​ आज का पंचांग ​ आज का राशिफल ​ चैत्र कृष्ण तृतीया ​ हस्त नक्षत्र ​ गण्ड योग ​ शुक्रवार राशिफल ​ #AajKaPanchang #AajKaRashifal

Day 33: ज्ञान, योग और धर्मक्षेत्र | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक: भगवान का आदर्श— यदि मैं भी कर्म न करूँ तो सब लोग बिगड़ जाएँ  (3.23) ज्ञान से बढ़कर पवित्र कुछ नहीं —कर्मयोग से शुद्ध होकर ज्ञान स्वयं प्रकट होता है (4.38) अन्तःसुख, अन्तराराम, अन्तर्ज्योति —ऐसा योगी ब्रह्मनिर्वाण प्राप्त करता है (5.24) जहाँ  योगेश्वर कृष्ण + धनुर्धर अर्जुन  हैं, वहीं श्री, विजय, भूतिः और ध्रुवा नीति है (18.78) शुरुआत का प्रश्न— “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे… मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?”  (1.1) 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok CTA: कमेंट में लिखिए—“आज का मेरा श्लोक = (3.23/4.38/5.24/18.78/1.1)” और “आज मैं किस काम में ‘कर्म + ज्ञान + अन्तःसुख’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?” #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #JnanaYoga #Dharmakshetra #Day33

Day 32: क्षेत्र, श्रद्धा और घोर तप | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

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  आज के 5 श्लोक: क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ परिचय —क्षेत्र क्या है, कैसा है, उसके विकार और कारण क्या हैं, क्षेत्रज्ञ कौन है (13.3) विशुद्ध बुद्धि + धृति —इन्द्रियनियम, विषय-त्याग, राग-द्वेष का निष्कासन (18.51 संदर्भ के साथ 18.51–53 सेट‑अप) ​ जो जिस देव‑तनु को पूजना चाहे —उसी देवता में उसकी अचल श्रद्धा मैं ही स्थिर करता हूँ (9.21 संदर्भ 7.21) ​ त्रिविधा श्रद्धा —सात्त्विकी, राजसी, तामसी, स्वभावजा (17.2) अशास्त्रविहित घोर तप —दम्भ, अहंकार, काम‑राग‑बल से प्रेरित कठोर तप (17.5) 🌐 Ramshalaka :  https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka ​ 🌐 Mood-based Geeta Shlok :  https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok ​ CTA: कमेंट में लिखिए—“आज का मेरा श्लोक = (13.3/18.51/9.21/17.2/17.5)” और “आज मैं किस जगह अपनी श्रद्धा को ‘सात्त्विक’ दिशा में मोड़ने का अभ्यास करूँगा/करूँगी?” ​ #HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #KshetraKshetrajna #TrividhaShraddha #Day32