Day 108 | 5 Shlok Per Day | दो मार्ग, दैवी-दानवी वृत्ति, संन्यास-कर्मयोग और समत्व
आज के 5 श्लोक बताते हैं कि मुक्ति का एक सनातन मार्ग है और वापसी का भी, आसुरी प्रवृत्तियाँ ईश्वर-द्वेष तक ले जाती हैं, संन्यास और कर्मयोग को अलग मानना भ्रम है, अर्जुन अपनी भूल स्वीकारता है, और समत्व वाला कर्मयोगी बंधन से मुक्त रहता है। 8.26 देवयान-पितृयान के दो मार्गों का वर्णन करता है, जबकि 4.22 समदृष्टि वाले कर्मयोगी की मुक्ति-स्थिति दिखाता है। Description Day 108 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: शुक्ल और कृष्ण मार्गों का सनातन भेद (8.26), अहंकार-क्रोध-निन्दा से युक्त दानवी प्रवृत्ति (16.18), संन्यास और कर्मयोग का एकत्व (5.4), अर्जुन की विनम्र क्षमा-याचना (11.41), और यदृच्छालाभ में संतुष्ट समकर्मी का बंधन-मुक्त कर्म (4.22)। यह episode Jagat Ka Saar को path, humility, integration और equanimity के साथ जोड़ता है। वीडियो शुरू करने से पहले: Channel को Subscribe कर लीजिए। Video को Like कर दीजिए। इसे Share कीजिए ताकि हर घर गीता का mission आगे बढ़े। Comment में लिखिए: “मेरा श्लोक = ” और: “आज का Jagat Ka Saar = ” Tags #Day108 #5ShlokPerDay #BhagavadGita #गीता #देवयान #पित...