Day 43: भय, स्पर्श और इन्द्रिय-नाव | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series (with Quiz)


 

आज के 5 श्लोक:

  1. दुर्योधन का पहला कदम—पाण्डवों की व्यूहरचित सेना देखकर द्रोणाचार्य के पास भागना (1.2)

  2. “तीन लोक भी नहीं चाहिए”—स्वजन-वध से अर्जुन का हृदय हिल जाना (1.35)

  3. शीतोष्ण-सुखदुःख = मात्रास्पर्श—आगमापायि, अनित्य, तान् तितिक्षस्व (2.14)

  4. कामात्मा, स्वर्गपरा, पुष्पित वाच—भोग-ऐश्वर्य की चकाचौंध में फँसा मन (2.43)

  5. इन्द्रिय-नाव और मन-वायु—एक इन्द्रिय के पीछे भागता मन पूरी प्रज्ञा को उड़ा ले जाता है (2.67)

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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (1.2/1.35/2.14/2.43/2.67)"
और "आज मैं किस जगह ‘तितिक्षा + इन्द्रिय-संयम’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"

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