Day 44: मृत्यु-चक्र, पाप-प्रेरणा और अनन्य भक्ति
आज के 5 श्लोक (Script + Quiz सहित तैयार)
2.27 – जन्मे की मृत्यु, मरे का जन्म निश्चित
3.36 – “मैं न भी चाहूँ तो पाप क्यों कर बैठता हूँ?”
8.22 – समस्त जगत से व्याप्त परम पुरुष, जो केवल अनन्य भक्ति से मिलता है
10.5 – अहिंसा, समता, तुष्टि, यश–अयश—सब भाव भगवान से ही उत्पन्न
2.46 – जैसे बड़े सरोवर से मिलने पर छोटे कुएँ की ज़रूरत कम हो जाती है
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