Day 23: अन्त समय का भाव (8.6) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series


 

आज के 5 श्लोक इन पाँच बातों पर रोशनी डालते हैं:

  1. अन्त समय में जो भाव स्मरण होगा, वही फल मिलेगा—इसलिए जीवन भर का अभ्यास महत्वपूर्ण है (8.6)

  2. गीता श्रवण के बाद भगवान का प्रश्न: “क्या तेरा अज्ञानजनित मोह नष्ट हुआ?” (18.72)

  3. जिनके लिए राज्य और भोग चाहिए थे, वही आज प्राण और धन त्यागकर युद्धभूमि में खड़े हैं (1.33)

  4. भगवान का अवतार-तत्त्व: साधुओं की रक्षा, दुष्टों का विनाश और धर्म की स्थापना (4.8)

  5. समबुद्धि से कर्म करने वाला यहीं रहते हुए पुण्य-पाप दोनों से मुक्त हो जाता है—“योगः कर्मसु कौशलम्” (2.50)

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“आज का मेरा श्लोक = (8.6/18.72/1.33/4.8/2.50)”
और “आज मैं किस भाव का अभ्यास करूँगा/करूँगी, जो अन्त समय में भी याद रहे?”


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