Day 39: मैं कुछ नहीं करता – भक्त कभी नहीं हारता | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
“मैं कुछ नहीं करता” भावना—इन्द्रियाँ ही इन्द्रियार्थों में लग रही हैं (5.9)
“मेरा भक्त नष्ट नहीं होता”—वह शीघ्र धर्मात्मा होकर शाश्वत शान्ति पाता है (9.31)
“अब ज्ञान कह दिया, सोचकर जैसा चाहो वैसा करो”—पूर्ण freedom with विवेक (18.63)
दम्भी, आत्मसम्भावित, नामयज्ञ—शास्त्र-विहीन, दिखावे के यज्ञ (16.17)
दो पुरुष: क्षर और अक्षर—क्षर: नश्वर शरीर, अक्षर: कूटस्थ जीवात्मा (15.16)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (5.9/9.31/18.63/16.17/15.16)"
और "आज मैं किस काम में ‘मैं कुछ नहीं करता / मेरा भक्त नष्ट नहीं होता’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"
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