Day 64: राजस कर्म, कर्म-परिभाषा और गुणों का रहस्य | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के Day 64 में 5 शक्तिशाली श्लोक हैं—कामना और अहंकार से किए गए बहुलायास कर्म की पहचान, कर्म-अध्यात्म-ब्रह्म की गीता-परिभाषा, ज्ञानयज्ञ के रूप में इस धर्ममय संवाद का पाठ, परम्परागत योग का लोप, और सत्त्व-रजस-तमस से ज्ञान/लोभ/मोह/अज्ञान की उत्पत्ति। 18.24 बताता है कि जो कर्म भोग-इच्छा या अहंकार से बहुत परिश्रम के साथ किया जाए, वह राजस है।
यह episode उन लोगों के लिए है जो अपनी daily life में यह समझना चाहते हैं कि कौन-सा कर्म शुद्ध, कौन-सा राजस, और कौन-सा तामस है। 18.7 में भगवान बताते हैं कि यह योग परम्परा से प्राप्त था, पर समय के साथ लुप्तप्राय हो गया; और 14.17 स्पष्ट करता है कि सत्त्व से ज्ञान, रजस से लोभ, और तमस से प्रमाद, मोह तथा अज्ञान उत्पन्न होते हैं।
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"मेरा श्लोक = 18.24 / 4.3 / 18.7 / 14.17 / 4.2"
"आज मैंने किस श्लोक को अपने व्यवहार में उतारने की कोशिश की?"
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