भगवान की सर्वज्ञता – श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 26


 

ईश्वर भूत, वर्तमान और भविष्य सब जानते हैं

श्लोक:
वेदा॑हं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन।
भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन॥

अनुवाद:
"हे अर्जुन! मैं भूतकाल, वर्तमान और भविष्य के समस्त जीवों को जानता हूँ, किंतु मुझे कोई नहीं जानता।"


इस श्लोक का अर्थ और महत्व

भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक में अपनी सर्वज्ञता (सर्व कुछ जानने की शक्ति) का वर्णन कर रहे हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि वे समय के तीनों पहलुओं – भूत (अतीत), वर्तमान और भविष्य – को पूरी तरह जानते हैं। लेकिन साधारण मनुष्य उनके वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचान पाते।

1. भगवान की सर्वज्ञता (Omniscience of God)

भगवान श्रीकृष्ण यह बताते हैं कि वे संपूर्ण ब्रह्मांड के प्रत्येक प्राणी के अतीत, वर्तमान और भविष्य से पूर्णतः परिचित हैं। उनकी दृष्टि में कोई भी घटना छिपी नहीं रहती।

2. जीवों की सीमित बुद्धि

मनुष्य की बुद्धि सीमित होती है, और वह अपने वर्तमान अनुभवों और ज्ञान के आधार पर ही सोच सकता है। लेकिन भगवान त्रिकालदर्शी हैं – वे समय के बंधनों से मुक्त हैं। इसलिए वे सब कुछ जानते हैं, लेकिन साधारण व्यक्ति उन्हें नहीं जान पाते।

3. हमें भगवान को जानने के लिए क्या करना चाहिए?

यदि भगवान को कोई नहीं जानता, तो उन्हें जानने का उपाय क्या है? श्रीमद्भगवद्गीता में ही बताया गया है कि भक्ति, श्रद्धा और ज्ञान के द्वारा मनुष्य भगवान को पहचान सकता है।


क्या यह शिक्षा आज भी प्रासंगिक है?

आज के समय में भी मनुष्य केवल अपने सीमित अनुभवों के आधार पर निर्णय लेता है और भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। लेकिन यदि हमें यह विश्वास हो कि भगवान हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य को जानते हैं और हमें सही दिशा में ले जा सकते हैं, तो हमारी चिंताएँ कम हो सकती हैं। इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने अहंकार को त्यागकर श्रद्धा और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए।


काहूट क्विज़ (Kahoot Quiz) – श्रीमद्भगवद्गीता 7.26

काहूट टाइटल:

"भगवान की सर्वज्ञता – भूत, वर्तमान और भविष्य"

क्विज़ इंट्रोडक्शन:

श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे सभी जीवों का अतीत, वर्तमान और भविष्य जानते हैं, लेकिन कोई उन्हें पूर्णतः नहीं जान सकता। यह क्विज़ आपको यह समझने में मदद करेगा कि ईश्वर की सर्वज्ञता क्या है और हमें उनके मार्ग को पहचानने के लिए क्या करना चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

Day 71: दिव्य दृष्टि, देहान्तरण और योगारूढ़ शांति | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

Day 68: सर्वत्र दर्शन, संतुष्ट भक्त और पुरुषोत्तम-शरण | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series