Day 17: उग्र रूप से सात्त्विक ज्ञान तक (11.31, 18.20) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
विराट रूप के सामने अर्जुन का प्रश्न – “हे उग्ररूप! आप कौन हैं?” (11.31)
जो लोग अन्य देवताओं को भी अंत में उसी परमेश्वर की पूजा कर रहे हैं (9.23)
बाहर से इन्द्रिय-निग्रह, भीतर से विषय-स्मरण = मिथ्याचार (3.6)
दुर्योधन का आदेश – “सब मोर्चों पर भीष्म की रक्षा करो” (1.11 संदर्भ-श्रृंखला, यहाँ 1.11 का भाव)
सात्त्विक ज्ञान – सब भूतों में एक अविनाशी भाव को देखना (18.20)
🌐 Ramshalaka : https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka
🌐 Mood-based Geeta Shlok : https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok
CTA (Description/Pinned Comment):
कमेंट में लिखिए:
“आज का मेरा श्लोक = (11.31/9.23/3.6/1.11/18.20)”
और “आज मैं किस चीज़ में ‘सात्त्विक दृष्टि’ या ‘सच्चा संयम’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?”
#HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #ViratRup #SattvikGyaan #IndriyaNigrah #Day17
Comments
Post a Comment