Day 33: ज्ञान, योग और धर्मक्षेत्र | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series


 

आज के 5 श्लोक:

  1. भगवान का आदर्श—यदि मैं भी कर्म न करूँ तो सब लोग बिगड़ जाएँ (3.23)

  2. ज्ञान से बढ़कर पवित्र कुछ नहीं—कर्मयोग से शुद्ध होकर ज्ञान स्वयं प्रकट होता है (4.38)

  3. अन्तःसुख, अन्तराराम, अन्तर्ज्योति—ऐसा योगी ब्रह्मनिर्वाण प्राप्त करता है (5.24)

  4. जहाँ योगेश्वर कृष्ण + धनुर्धर अर्जुन हैं, वहीं श्री, विजय, भूतिः और ध्रुवा नीति है (18.78)

  5. शुरुआत का प्रश्न—“धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे… मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?” (1.1)

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कमेंट में लिखिए—“आज का मेरा श्लोक = (3.23/4.38/5.24/18.78/1.1)”
और “आज मैं किस काम में ‘कर्म + ज्ञान + अन्तःसुख’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?”

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