Day 35: अन्तकाल स्मरण से परम धाम तक | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
अन्तकाल में भगवान का स्मरण—जो देह छोड़ते समय मुझे याद करता है, वह मेरे स्वरूप को पाता है (8.5)
दैवी गुण—अहिंसा, सत्य, अक्रोध, त्याग, शान्ति, दया, अलोलुप्त्व आदि (16.2)
अर्जुन की शंका—मन की चञ्चलता के कारण समत्वयोग की स्थिर स्थिति कठिन लगती है (6.33)
अव्यक्त अक्षर परम गति—जिसे पाकर लौटना नहीं पड़ता, वही मेरा परम धाम है (8.21)
प्राणायाम यज्ञ—प्राण को अपान में, अपान को प्राण में अर्पित करना (4.29)
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कमेंट में लिखिए—“आज का मेरा श्लोक = (8.5/16.2/6.33/8.21/4.29)”
और “आज मैं किस अभ्यास से ‘स्मरण + शान्ति + दैवी गुण’ को बढ़ाऊँगा/बढ़ाऊँगी?”
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