Day 48: आत्मा शाश्वत, प्रभु सर्वस्व, और स्थितप्रज्ञ | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series


 

आज के 5 श्लोक:

  1. “हम कभी थे नहीं – ऐसा कभी नहीं”—आत्मा का शाश्वत अस्तित्व (2.12)

  2. जो जरा–मरणमोक्ष के लिए मुझे आश्रय लेते हैं—वे ब्रह्म, अध्यात्म और सम्पूर्ण कर्म को जानते हैं (7.29)

  3. शंख–भेरी–मृदंग–गोमुख—दोनों सेनाओं की आरम्भिक तुमुल ध्वनि (1.13)

  4. “मैं जगत का पिता, माता, धाता, पितामह हूँ”—वेद्य, पवित्र ओंकार, ऋक–साम–यजुः भी मैं ही (9.17)

  5. दुःख में अनुद्विग्न, सुख में निःस्पृह—वीत राग–भय–क्रोध स्थिरबुद्धि मुनि (2.56)

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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (2.12/7.29/1.13/9.17/2.56)"
और "आज मैं किस तरह ‘आत्मा की नित्यता + भगवान का सर्वस्वत्व + स्थितप्रज्ञ भाव’ को जीने की कोशिश करूँगा/करूँगी?"

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