Day 49: ॐ तत् सत्, कर्म में अकर्म और ज्ञानदीप | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
ॐ तत् सत् – ब्रह्म के तीन निर्देश—इन्हीं से ब्राह्मण, वेद और यज्ञ रचे गए (17.23)
कर्म में अकर्म, अकर्म में कर्म—जो ऐसा देखे वही बुद्धिमान, सच्चा योगी (4.18)
योगी को कैसा जीवन जीना चाहिए?—एकान्त, एकाकी, यतचित्त, निराशी, अपरिग्रह (6.10)
“तेरे आगे–पीछे सब ओर नमस्कार”—अनन्तवीर्य, अमितविक्रम विश्वरूप की स्तुति (11.40)
ज्ञानदीप से अज्ञान-अन्धकार का नाश—भगवान स्वयं भक्त के हृदय में स्थित होकर अज्ञान मिटाते हैं (10.11)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (17.23/4.18/6.10/11.40/10.11)"
और "आज मैं किस जगह ‘ॐ तत् सत् भावना + कर्म में अकर्म दृष्टि + भीतर के ज्ञानदीप’ को याद रखूँगा/रखूँगी?"
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