Day 51: पाँच कारण, स्थिर बुद्धि और स्पष्ट मार्ग | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
पंच कारण – कर्म की सिद्धि के हेतु (18.13)
शुभ–अशुभ में न अत्यधिक प्रसन्न, न द्वेष—अनभिस्नेह स्थितप्रज्ञ (2.57)
श्रुतिविप्रतिपन्न बुद्धि—जब परमात्मा में निश्चल हो, तब योग की प्राप्ति (2.53)
भव–अप्यय, और अव्यय माहात्म्य—अर्जुन ने सृष्टि–प्रलय और भगवान की महिमा सुनी (11.2)
कर्मसंन्यास vs कर्मयोग?—“कौन सा मार्ग मेरे लिए निश्चित रूप से श्रेष्ठ है?” (5.1)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (18.13/2.57/2.53/11.2/5.1)"
और "आज मैं किस जगह ‘पाँच कारण की जागरूकता + स्थिर बुद्धि + मार्ग की स्पष्टता’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"
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