Day 59: कर्म से अनासक्ति, सबके लिए परमगति | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
कर्म मुझको नहीं बाँधते—क्योंकि मैं उनमें उदासीनवत् स्थित हूँ (9.9)
अर्जुन ने विराट में सबको प्रवेश करते देखा—धृतराष्ट्र-पुत्र, भीष्म, द्रोण, कर्ण, सब (11.26)
मेरे भक्त के लक्षण—अनपेक्ष, शुचि, दक्ष, उदासीन, गतव्यथ, सर्वारम्भपरित्यागी (12.16)
भगवान को वेद, तप, दान, यज्ञ से नहीं देखा जा सकता—जैसा अर्जुन ने देखा, वैसा विशेष कृपा से (11.53)
स्त्री, वैश्य, शूद्र, पापयोनि भी शरण लेकर परमगति पाते हैं (9.32)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (9.9/11.26/12.16/11.53/9.32)"
और "आज मैं किस जगह ‘अनासक्ति + भक्ति का शुद्ध भाव + सबके लिए आशा’ को जीऊँगा/जीऊँगी?"
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