Day 73: चार प्रकार के भक्त, दिव्य रूप और चंचल मन | हर हर गीता, हर घर गीता!
आज के Day 73 में 5 बहुत ही शक्तिशाली श्लोक हैं—चार प्रकार के भक्त, अर्जुन को दिखाया गया परम ऐश्वर्ययुक्त रूप, मन की चंचलता का ईमानदार स्वीकार, भाव-समन्वित बुद्धिमान की भक्ति, और अहंकार, दर्प, काम-क्रोध-परिग्रह से मुक्त होकर ब्रह्मभूत होने की योग्यता। 7.16 में भगवान कहते हैं कि आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी—ये चार प्रकार के सुकृती भक्त उन्हें भजते हैं।
यह episode उन साधकों के लिए है जो अपनी भक्ति, मन और साधना को समझदारी से देखना चाहते हैं। 11.9 में संजय कहते हैं कि भगवान ने अर्जुन को परम ऐश्वर्ययुक्त दिव्य रूप दिखाया; 6.34 में अर्जुन मन की चंचलता को वायु की तरह पकड़ से बाहर बताता है; 10.8 में बुद्धिमान भक्त भगवान को सबका कारण समझकर भजते हैं; और 18.53 बताता है कि अहंकार, दर्प, काम, क्रोध और परिग्रह का त्याग करके शान्त पुरुष ब्रह्मभूयाय पात्र बनता है।
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"मेरा श्लोक = 7.16 / 11.9 / 6.34 / 10.8 / 18.53"
"आज मैंने किस जगह मन, भक्ति या अहंकार का observe किया?"
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