Day 75 Script | कर्म, गुण और भगवान के दिव्य स्वरूप


 आज के इस set में आप कर्मयोग, सांख्यभाव, सृष्टि-रचना, गुणों की गति, और भगवान के ऐश्वर्य को एक साथ सुनेंगे। 5.13, 2.47, 10.06, 14.18 और 10.22 एक बहुत सुंदर progression बनाते हैं—अंदर से शांत कर्म, फिर फल-त्याग, फिर सृष्टि का रहस्य, फिर गुणों के अनुसार गति, और अंत में भगवान के सर्वश्रेष्ठ रूप।



Description

आज का episode उन लोगों के लिए है जो कर्म करते हुए भी भीतर से free रहना चाहते हैं। 5.13 में बताया गया है कि वशी पुरुष सब कर्म मन से त्यागकर नवद्वारों वाले शरीर में सुखपूर्वक स्थित रहता है, 2.47 में कर्म पर अधिकार और फल-त्याग का सिद्धांत आता है, 10.06 में सृष्टि-उत्पत्ति का रहस्य, 14.18 में सत्त्व, रज और तम की गति, और 10.22 में भगवान स्वयं को सामवेद, इन्द्र, मन और चेतना बताते हैं।

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