Day 78 Script | विश्वरूप का भय, कर्म-बन्धन से मुक्ति और साधना का दुर्लभ मार्ग



आज के श्लोक बहुत शक्तिशाली हैं—विश्वरूप में विनाश का दृश्य, भगवान का कर्मों से अलिप्त होना, गुप्त शास्त्र का उपदेश, भगवान को तत्त्वतः जानने की दुर्लभता, और आत्मा द्वारा क्षेत्र को प्रकाशित करने का रहस्य। 11.29 और 4.14 particularly बहुत deep हैं: एक तरफ भय और नाश का चित्र, दूसरी तरफ निष्कर्म भाव की मुक्ति।

Description

Day 78 में आप सुनेंगे कि कैसे पतंगों की तरह लोक भगवान के ज्वलंत मुखों में प्रवेश करते हैं, कैसे भगवान कर्मों से नहीं लिप्त होते, कैसे यह अति-गोपनीय शास्त्र कृतकृत्य बनाता है, कैसे हजारों में कोई एक ही भगवान को तत्त्वतः जानता है, और कैसे एक ही आत्मा सम्पूर्ण क्षेत्र को प्रकाशित करती है। 11.29, 4.14, 15.2, 7.3 और 13.33 मिलकर भय, ज्ञान, भक्ति और आत्मतत्त्व का अद्भुत संतुलन बनाते हैं।

वीडियो शुरू करने से पहले:

  • Channel ko Subscribe कर लीजिए।

  • Video ko Like कर दीजिए।

  • इस video को Share कीजिए उस व्यक्ति के साथ जिसे गीता का intense wisdom पसंद है।

  • Comment me लिखिए: “मेरा review: 

  • और एक line में बताइए: “आज मैंने कौन-सा truth पकड़ा”

Tags

#Day78 #BhagavadGita #GitaShlok #गीता #विश्वरूप #कर्मयोग #परमार्थ #आत्मतत्त्व #हरहरगीता #हरघरगीता #GitaInHindi #DailyShlok

Comments

Popular posts from this blog

Day 71: दिव्य दृष्टि, देहान्तरण और योगारूढ़ शांति | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series

Day 68: सर्वत्र दर्शन, संतुष्ट भक्त और पुरुषोत्तम-शरण | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series