Day 79 Script | इन्द्रिय नियंत्रण, समदर्शन, भगवान की शरणागति और वैश्वानर रहस्य



आज के श्लोक मन को वश में करने से लेकर अंतिम शरणागति तक का पूरा path दिखाते हैं। 2.64 में राग-द्वेष रहित इन्द्रिय विचरण से प्रसाद, 3.29 में ज्ञानी का गुणमोहितों को न विचालित करना, 5.18 में समदर्शन की महिमा, 15.14 में भगवान के वैश्वानर अग्नि रूप, और 18.66 में सर्वधर्म परित्याग कर भगवान की शरण में जाने का ultimate call। यह गीता का चरम संदेश है।

Description

Day 79 में आप सुनेंगे कि कैसे वशी इन्द्रियें प्रसाद देती हैं, ज्ञानी कैसे अज्ञानियों को विचलित नहीं करता, पंडित कैसे सभी में समदर्शन रखता है, भगवान कैसे वैश्वानर अग्नि बनकर चार प्रकार के अन्न को पचाते हैं, और अंत में भगवान का वचन—सर्वधर्म त्यागकर मेरी शरण आओ, मैं सब पापों से मुक्त कर दूँगा। 18.66 गीता का सार है।

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