Day 81 Script | निष्काम कर्म, राजस दान, समदर्शन और विश्वरूप की महिमा



आज के श्लोक सिद्ध पुरुष के निष्काम भाव, दान की राजस प्रकृति, समबुद्धि की श्रेष्ठता, विश्वरूप के अपार प्रकाश, और ज्ञान-भक्ति के विविध मार्ग दिखाते हैं। 3.18 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है—सिद्ध पुरुष के लिए न कर्म से प्रयोजन, न अकर्म से, और न किसी से स्वार्थ।

Description

Day 81 में आप सुनेंगे कि महापुरुष के लिए कर्म-अकर्म दोनों से कोई प्रयोजन नहीं रहता (3.18), राजस दान कैसे होता है (17.21), समबुद्धि सर्वोत्तम है (6.9), विश्वरूप का प्रकाश हजार सूर्यों से भी अधिक है (11.12), और ज्ञानयज्ञ से भगवान की उपासना कैसे होती है (9.15)। ये श्लोक निष्कामता, समदर्शन और विविध उपासना-मार्गों का सुंदर चित्रण करते हैं।

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