Day 100 | 5 Shlok Per Day | अभ्यासयोग, विराट दर्शन, स्वकर्म और गुण-भेद
आज के 5 श्लोक ध्यान, विराट रूप, कर्मयोग, अकर्तृत्व-बोध और गुणों के आधार पर ज्ञान-कर्म-कर्ता के भेद को एक साथ जोड़ते हैं। 8.8 में अभ्यासयोगयुक्त चित्त से परम पुरुष की प्राप्ति का मार्ग बताया गया है, और 11.20 में अर्जुन विराट रूप के कारण तीनों लोकों की व्यथा देखता है।
Description
Day 100 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: अभ्यासयोग से परम पुरुष की प्राप्ति (8.8), विराट और उग्र रूप से तीनों लोकों की व्यथा (11.20), स्वकर्म द्वारा परमेश्वर की पूजा और सिद्धि (18.46), प्रकृति द्वारा होते कर्मों को देखना और आत्मा को अकर्ता जानना (13.29), तथा ज्ञान-कर्म-कर्ता के तीन-तीन भेद (18.19)। यह episode Jagat Ka Saar को meditation, surrender, action और wisdom के साथ जोड़ता है।
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