Day 106 | 5 Shlok Per Day | रजोगुण, लोभ, विराट-समर्पण और कर्मयोग
आज के 5 श्लोक रजोगुण से उपजने वाले लोभ और अशान्ति, आसुरी संचय-भाव, विराट रूप के सामने अर्जुन की विनती, और कमल-पत्र जैसी कर्मयोग की शुद्धि को एक साथ रखते हैं। 14.12 में रजोगुण बढ़ने पर लोभ, प्रवृत्ति, सकाम कर्म-आरम्भ, अशान्ति और भोग-लालसा की वृद्धि बताई गई है, जबकि 5.1 कर्मों को परमात्मा में अर्पित कर आसक्ति-रहित कर्म का मार्ग दिखाता है।
Description
Day 106 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: रजोगुण से उपजे लोभ और अशान्ति (14.12), धन-संग्रह की आसुरी मानसिकता (16.13), कुल-नाश और पितरों के अधःपतन की चेतावनी (1.42), विराट पुरुष के समक्ष समर्पण और क्षमा-याचना (11.44), तथा ब्रह्मार्पण-भाव से किया गया कर्म जो पाप से लिप्त नहीं करता (5.10)। यह episode Jagat Ka Saar को self-check, humility, surrender और detached action के साथ जोड़ता है।
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