Day 111 | 5 Shlok Per Day | अर्जुन का मोह, परमपद, लोक-प्रेरणा, यज्ञेश्वर और भीष्म का शंखनाद
आज के 5 श्लोक मोह से भरी युद्धभूमि, परमपद की खोज, श्रेष्ठ पुरुष का प्रभाव, भगवान का यज्ञों में स्वामित्व, और भीष्म के सिंहनाद को एक साथ जोड़ते हैं। 1.26 में अर्जुन अपने सामने खड़े स्वजनों को देखकर व्यथित होता है, जबकि 8.11 में परम अक्षर पद का संक्षेप मार्ग बताया गया है।
Description
Day 111 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: युद्धभूमि में अर्जुन का स्वजन-दर्शन (1.26), वेदविदों के बताए गए अक्षर-परमपद का संक्षेप (8.11), श्रेष्ठ पुरुष के आचरण का समाज पर प्रभाव (3.21), भगवान का सर्वयज्ञ-भोक्ता और प्रभु होना (9.24), तथा भीष्म पितामह का सिंहनाद शंख (1.12)। यह episode Jagat Ka Saar को grief, transcendence, leadership, surrender और battlefield resolve के साथ जोड़ता है।
वीडियो शुरू करने से पहले:
Channel को Subscribe कर लीजिए।
Video को Like कर दीजिए।
इसे Share कीजिए ताकि हर घर गीता का mission आगे बढ़े।
Comment में लिखिए: “मेरा श्लोक = ”
और: “आज का Jagat Ka Saar = ”
Tags
#Day111 #5ShlokPerDay #BhagavadGita #गीता #परमपद #श्रेष्ठपुरुष #यज्ञभोक्ता #हरहरगीता #हरघरगीता #जगतकासार #GitaInHindi
Comments
Post a Comment