Day 96 | 5 Shlok Per Day | सृष्टि का रहस्य, ऐश्वर्य-दर्शन और समुद्र जैसी शान्ति
आज के 5 श्लोक बताते हैं कि समस्त प्राणियों की उत्पत्ति में प्रकृति माता है और भगवान बीजप्रद पिता हैं, ज्ञानीजन लोकसंग्रह के लिए कर्म करते हैं, और स्थितप्रज्ञ पुरुष समुद्र की तरह कामनाओं से विचलित नहीं होता। गीता 14.4 स्पष्ट कहती है कि सब योनियों में उत्पन्न होने वाले शरीरों की महद्योनि प्रकृति है और भगवान स्वयं बीजप्रद पिता हैं।
Description
Day 96 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: सृष्टि का दिव्य रहस्य (14.4), धृष्टकेतु से शैब्य तक महारथियों का परिचय (1.5), अर्जुन की ऐश्वर्य-रूप दर्शन की इच्छा (11.3), जनकादि की कर्म द्वारा सिद्धि और लोकसंग्रह (3.20), और समुद्र समान स्थितप्रज्ञ की शान्ति (2.70)। ये 5 श्लोक creation, duty, दर्शन और inner stability को एक सूत्र में बाँधते हैं।
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