Day 122 | 5 Shlok Per Day | विराट रूप की स्तुति, योगमाया, काल और विश्वरूप-दर्शन


आज के 5 श्लोक भगवान के विराट रूप की स्तुति, उनकी योगमाया से ढकी अदृश्यता, ब्रह्म के दिन-रात का कालबोध, और विश्वरूप में दिव्य विभूतियों के दर्शन को एक साथ रखते हैं। 11.39 अर्जुन की पूर्ण समर्पित नमस्कार-भावना दिखाता है, जबकि 11.6 और 10.26 भगवान के भीतर दिखाई देने वाली दिव्य विभूतियों का संकेत देते हैं.

Description

Day 122 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: वायु, यम, अग्नि, वरुण, चन्द्र और ब्रह्मा के भी पिता के रूप में भगवान की स्तुति (11.39), पीपल, नारद, चित्ररथ और कपिल के रूप में उनकी विभूति (10.26), योगमाया से आच्छादित होने के कारण भगवान का अज्ञानी जनों को न दिखना (7.25), ब्रह्मा के एक दिन और रात का सहस्रयुगीय कालबोध (8.17), और विश्वरूप में आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों तथा मरुद्गणों का दर्शन (11.6)। यह episode Jagat Ka Saar को cosmic vision, surrender, time, and divine presence के साथ जोड़ता है.

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