Day 135 | 5 Shlok Per Day | निरन्तर स्मरण, विराट स्वरूप, सहज प्राप्ति
आज के 5 श्लोक बताते हैं कि हर समय भगवान का स्मरण करते हुए कर्तव्य निभाना चाहिए, विराट रूप में श्रीकृष्ण सबका परम आश्रय हैं, अनन्य स्मरण से भगवान सुलभ हो जाते हैं, अव्यभिचारी भक्तियोग से साधक गुणों से परे उठता है, और मन्मना-मद्भक्त-मद्याजी बनकर मनुष्य श्रीकृष्ण को ही प्राप्त होता है। 8.7 और 18.65 साधना का सीधा सूत्र देते हैं, जबकि 11.38 और 14.26 भक्ति और विराटता के ऊँचे आयाम खोलते हैं।
Description
Day 135 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: सब कालों में श्रीहरि का स्मरण करते हुए युद्ध या कर्तव्य निभाने की शिक्षा (8.7), भगवान का आदिदेव, पुराण पुरुष, परम आश्रय और अनन्तरूप होना (11.38), अनन्य चेतना से निरन्तर स्मरण करने वाले योगी के लिए भगवान का सुलभ होना (8.14), अव्यभिचारी भक्तियोग से तीनों गुणों का अतिक्रमण और ब्रह्मभूय के योग्य बनना (14.26), तथा मन्मना, मद्भक्त, मद्याजी, माम् नमस्कुरु—यह प्रत्यक्ष भक्ति-पथ (18.65)। यह episode Jagat Ka Saar को remembrance, surrender, transcendence, and direct devotion के साथ जोड़ता है.
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