Day 136 | 5 Shlok Per Day | अविनाशी आत्मा, तमोगुण का बंधन, कर्तृत्व-भ्रम, कुलधर्म की रक्षा और विराट स्तुति



आज के 5 श्लोक आत्मा की अविनाशिता, तमोगुण के अज्ञानजन्य बंधन, कर्ता-भाव के भ्रम, कुलधर्म के विघटन के भय, और विराट रूप में श्रीकृष्ण की सर्वोच्चता को एक साथ रखते हैं। 2.24 और 11.37 साधक को आत्मा की शाश्वतता और भगवान की अनन्तता का बोध कराते हैं, जबकि 14.8, 18.16 और 1.43 मन, कर्म और समाज के स्तर पर होने वाले पतन की चेतावनी देते हैं।

Description

Day 136 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: आत्मा का अच्छेद्य, अदाह्य, अक्लेद्य, अशोष्य, नित्य, सर्वगत, स्थाणु, अचल और सनातन होना (2.24), तमोगुण का अज्ञान से उत्पन्न होकर प्रमाद, आलस्य और निद्रा के द्वारा बांधना (14.8), अशुद्ध बुद्धि से आत्मा को कर्ता समझने का भ्रम (18.16), कुलघातियों के कारण सनातन कुलधर्म और जातिधर्म के नाश की चेतावनी (1.43), और श्रीकृष्ण का ब्रह्म के भी आदिकर्ता, देवेश, जगन्निवास, सत्-असत् और अक्षर से परे होना (11.37)। यह episode Jagat Ka Saar को imperishability, vigilance, right understanding, social dharma, and divine supremacy के साथ जोड़ता है.

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