भगवान का आश्रय लेने वालों को ब्रह्म प्राप्ति – श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 29


 

भगवान का आश्रय लेने वालों को ब्रह्म प्राप्ति – श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7, श्लोक 29

श्लोक:

जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये।
ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्॥

अनुवाद:

"जो लोग जरा (बुढ़ापा) और मरण (मृत्यु) से मुक्त होने के लिए मेरा आश्रय लेकर यत्न करते हैं, वे ब्रह्म को, संपूर्ण आध्यात्मिक तत्त्व को और समस्त कर्मों के रहस्य को जान लेते हैं।"


इस श्लोक का अर्थ और महत्व

1. भगवान का आश्रय क्यों आवश्यक है?

  • मृत्यु और जन्म के चक्र से मुक्त होने के लिए भगवान की शरण आवश्यक है।
  • जो व्यक्ति श्रीकृष्ण के चरणों में पूर्ण समर्पण करता है, वही मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

2. ब्रह्म को जानने वाले कौन होते हैं?

  • जो भगवान का आश्रय लेते हैं, वे न केवल ब्रह्म को समझते हैं बल्कि संपूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान और सभी कर्मों के रहस्य को भी जान लेते हैं।

3. प्रयास करने (यत्न करने) का महत्व

  • केवल भगवान का नाम लेना पर्याप्त नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास (यत्न) करना आवश्यक है।
  • यह प्रयास सच्ची भक्ति, सत्संग, और आत्मज्ञान के माध्यम से किया जाता है।


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