Day 19: मेरी अष्टधा प्रकृति (7.04) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series


 

आज के 5 श्लोक:

  1. भगवान की अष्टधा (आठ भागों वाली) भिन्ना प्रकृति—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि, अहंकार (7.04)

  2. युद्धभूमि में अर्जुन जिन बन्धुओं को देखकर व्याकुल होते हैं—गुरुजन, पिता-तुल्य, पुत्र, पितामह, मामा, ससुर, पौत्र, साले, सम्बन्धी (1.34)

  3. विभूति योग—नागों में अनन्त, जलचरों में वरुण, पितरों में अर्यमा, संयम करने वालों में यम (10.29)

  4. आत्मा को नित्य जन्मने/नित्य मरने वाला मान लो, तब भी शोक उचित नहीं (2.26)

  5. पहले सांख्य (ज्ञान) की बुद्धि, फिर कर्मयोग—जिस बुद्धि से कर्मबंधन कटता है (2.39)

🌐 Ramshalaka : https://www.jagatpushpa.co.in/ramshalaka
🌐 Mood-based Geeta Shlok : https://www.jagatpushpa.co.in/Moodbasedshlok

CTA (Pinned/Description):
कमेंट में लिखिए: “आज का मेरा श्लोक = (7.04/1.34/10.29/2.26/2.39)”
और “आज मैं किस चीज़ में ‘अहंकार’ कम करूँगा/करूँगी—वाणी, काम, या रिश्ते?”

#HarHarGeeta #HarGharGeeta #Daily5Shlok #BhagavadGita #Prakriti #Ahamkar #Karmayoga #Day19

Comments