Day 22: आसुरी स्वभाव vs निष्काम कर्म (16.7, 3.19) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
आसुरी स्वभाव वाले प्रवृत्ति-निवृत्ति नहीं जानते, उनमें न शौच, न आचार, न सत्य (16.7)
निरन्तर निष्काम कर्म से परम पद प्राप्ति—आसक्ति रहित होकर कर्तव्य करो (3.19)
प्रेमी भक्तों का शीघ्र उद्धार—मृत्यु-संसार सागर से निकाल लूँगा (12.7)
दैवी गुणमयी माया दुस्तर, पर जो केवल मुझे भजते हैं वे पार हो जाते हैं (7.14)
मेरे-तेरे अनेक जन्म—मैं सब जानता हूँ, तू नहीं जानता (4.5)
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कमेंट में लिखिए: “आज का मेरा श्लोक = (16.7/3.19/12.7/7.14/4.5)”
और “आज मैं किस आसक्ति को छोड़कर निष्काम कर्म करूँगा/करूँगी?”
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