Day 24: दैवी गुणों की शुरुआत (16.01) | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
दैवी सम्पदा की शुरुआत—अभय, सत्त्वशुद्धि, ज्ञानयोग में दृढ़ता, दान, दम, यज्ञ, स्वाध्याय, तप, आर्जव (16.01)
जो मेरी विभूति और योग-शक्ति को तत्त्व से जानता है, वह अविकम्प (अडिग) भक्ति-योग से युक्त होता है (10.07)
कर्म-सिद्धि के 5 कारण—अधिष्ठान, कर्ता, करण, विविध चेष्टाएँ, और दैव (पाँचवाँ) (18.14)
राजस आहार—कड़वा/खट्टा/लवणयुक्त/अत्युष्ण/तीक्ष्ण/रूक्ष/दाहकारक; जो दुःख-शोक-रोग बढ़ाते हैं (17.09)
“धूम-मार्ग” (रात्रि, कृष्णपक्ष, दक्षिणायन)—इस मार्ग से गया सकाम कर्मयोगी चन्द्र-लोक पाकर भोग के बाद लौट आता है (8.25)
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