Day 36: मन चञ्चलता से दैवी गुणों तक | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series



 आज के 5 श्लोक:

  1. इन्द्रिय विषयों में राग-द्वेष—वे कल्याण मार्ग के महान शत्रु हैं (3.34)

  2. अविनाशी तत्त्व—जिससे सारा जगत व्याप्त है, उसी का नाश कोई नहीं कर सकता (2.17)

  3. ज्ञानी अज्ञानियों को भ्रमित न करे—स्वयं कर्म करे और करवावे भी (3.26)

  4. व्यास प्रसाद से सुना परम गोपनीय योग—कृष्ण से साक्षात् सुना संजय ने (18.75)

  5. मन दुर्निग्रह चञ्चल—अभ्यास + वैराग्य से वश में होता है (6.35)

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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (3.34/2.17/3.26/18.75/6.35)"
और "आज मैं किस इन्द्रिय विषय में राग-द्वेष को नियंत्रित करने का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"

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