Day 37: यज्ञ-मार्ग से एकत्व भक्ति तक | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series


 आज के 5 श्लोक:

  1. द्रव्ययज्ञ, तपोयज्ञ, योगयज्ञ—स्वाध्याय-ज्ञानयज्ञ करने वाले संशितव्रत यतयः (4.28)

  2. सर्वभूतस्थित भगवान को एकत्व से भजने वाला—सब प्रकार से मुझमें ही वर्तता है (6.31)

  3. योग दुःखसंयोगवियोग—धैर्य-उत्साह से निश्चयपूर्वक करना कर्तव्य (6.23)

  4. सगुण भक्त vs निर्गुण उपासक—दोनों में श्रेष्ठ योगवेत्ता कौन? (12.1)

  5. पांडव शंखनाद—भयानक घोष से धार्तराष्ट्रों के हृदय विदीर्ण (1.19)

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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (4.28/6.31/6.23/12.1/1.19)"
और "आज मैं किस यज्ञ/भक्ति को अपना 'संशितव्रत' बनाऊँगा/बनाऊँगी?"

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