Day 38: गुरु-भक्ति से क्षात्रधर्म तक | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
गुरूनहत्वा भैक्ष्यम् श्रेयः—महानुभाव गुरुओं को मारने से भिक्षा भी श्रेयस्कर (2.5)
अभ्यास असमर्थ तो मत्कर्मपरमो भव—मेरे लिए कर्मपरायण हो जा (12.10)
दुःखभय से कर्तव्य त्याग—राजस त्याग से त्यागफल नहीं मिलता (18.8)
क्षात्रकर्म स्वभावजम्—शौर्य, तेज, धृति, युद्ध में अपलायनम् (18.43)
अव्यक्त को व्यक्त मानते अबुद्धयः—मेरा परम अव्यय भाव न जानकर (7.24)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (2.5/12.10/18.8/18.43/7.24)"
और "आज मैं किस कर्तव्य को 'स्वभावज धर्म' मानकर निभाऊँगा/निभाऊँगी?"
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