Day 40: श्रद्धा, शिष्यभाव और ‘तत्’ भावना | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
सत्त्वानुरूप श्रद्धा—मनुष्य श्रद्धामय है, जैसी श्रद्धा, वैसा ही वह स्वयं (17.3)
उत्तरायण मार्ग—अग्नि, ज्योति, शुक्ल, उत्तरायण मार्ग से ब्रह्मविदों की गति (8.24)
कार्पण्यदोष + शिष्यभाव—“धर्मसम्मूढचेताः… शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्” (2.7)
दो मार्ग: आवृत्ति / अनावृत्ति—किस काल में गये योगी लौटते हैं, किसमें नहीं (8.23)
‘तत्’ भावना से यज्ञ-तप-दान—फल-संघर्ष छोड़कर केवल परमात्मा के नाम से (17.25)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (17.3/8.24/2.7/8.23/17.25)"
और "आज मैं किस जगह ‘शिष्यभाव + तत् भावना’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"
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