Day 41: स्वधर्म, संयम और योगयुक्त चित्त | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
धर्म्य संग्राम से भागना—स्वधर्म और कीर्ति खोकर पाप प्राप्त होगा (2.33)
इन्द्रिय-संयम यज्ञ—कुछ योगी इन्द्रियों को संयमाग्नि में, कुछ विषयों को इन्द्रियाग्नि में हवन करते हैं (4.26)
आहार, यज्ञ, तप, दान—तीनों प्रकार के होते हैं (17.7)
प्रकृति के अनुसार ही चेष्टा—ज्ञानवान भी अपने स्वभाव के अनुसार चलता है (3.33)
विनियत चित्त आत्मा में स्थित—कामनारहित वही योगयुक्त कहलाता है (6.18)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (2.33/4.26/17.7/3.33/6.18)"
और "आज मैं किस जगह अपने स्वधर्म, संयम या चित्त-नियमन का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"
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