Day 42: भगवान को कैसे सोचें? | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series


 

आज के 5 श्लोक:

  1. “कथं विद्यामहं योगिन्”—मैं आपको कैसे और किन-किन भावों में चिन्तन करूँ? (10.17)

  2. कृष्ण का वरदान—“मेरी प्रसन्नता से जो विश्वरूप तुमने देखा, किसी ने पहले नहीं देखा” (11.47)

  3. दैवी vs आसुरी प्रकृति—मनुष्यसमुदाय दो प्रकार: दैव और आसुर (16.6)

  4. तुल्य-निन्दा-स्तुति, मौनी, अनिकेत—ऐसा भक्त मुझे प्रिय है (12.19)

  5. अयुक्त मन = न बुद्धि, न भावना, न शान्ति, न सुख (2.66)

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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (10.17/11.47/16.6/12.19/2.66)"
और "आज मैं किस भाव से भगवान को ‘परिचिन्तन’ करने का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"

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