Day 53: सृष्टि–प्रलय, कर्म–यज्ञ और तत्त्वज्ञान | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
अव्यक्त से व्यक्त सृष्टि, रात में उसी में प्रलय—ब्रह्म के दिन–रात का चक्र (8.18)
ऐसा विश्वरूप किसी ने नहीं देखा—न वेद–यज्ञ–दान–क्रिया–उग्र तप से, केवल विशेष कृपा से (11.48)
कर्म ब्रह्मोद्भव, ब्रह्म अक्षरसमुद्भव—इसलिए सर्वगत ब्रह्म सदा यज्ञ में प्रतिष्ठित (3.15)
दण्ड, नीति, मौन, ज्ञान—इन सबके पीछे भी वही भगवान (10.38)
प्रकृति–पुरुष दोनों अनादि; सारे विकार–गुण प्रकृतिजन्य (13.19)
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कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (8.18/11.48/3.15/10.38/13.19)"
और "आज मैं किस जगह ‘सृष्टि–प्रलय की व्यापक दृष्टि + कर्म–यज्ञ की पवित्रता + प्रकृति–पुरुष तत्त्वज्ञान’ याद रखूँगा/रखूँगी?"
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