Day 58: युद्ध-सज्जा, ध्यान, और प्रकृति-पुरुष | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के 5 श्लोक:
कौरव-पक्ष के वीरों की गिनती—काशिराज, शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट, सात्यकि (1.17)
शनैः शनैः मन को परमात्मा में स्थिर करो—और और कुछ न सोचो (6.25)
सम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से उत्पन्न—और भगवान जगत का प्रभव–प्रलय हैं (7.6)
समबुद्धि वाले मनीषी फल त्यागकर अनामय पद को जाते हैं (2.51)
इन्द्रियों को वश में कर मत्पर होकर ध्यान में बैठो—तभी प्रज्ञा स्थिर होती है (2.61)
CTA:
कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (1.17/6.25/7.6/2.51/2.61)"
और "आज मैं किस जगह ‘धैर्यपूर्ण अभ्यास + इन्द्रिय-संयम + फलत्याग’ को जीऊँगा/जीऊँगी?"
Comments
Post a Comment