Day 69: सृष्टिचक्र, समर्पण और गुणातीत होने का मार्ग | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series



आज के Day 69 में 5 बड़े गूढ़ श्लोक हैं—सृष्टिचक्र के अनुकूल आचरण, मम साधर्म्य प्राप्त ज्ञान, मन्मना भव मद्भक्तो वाला पूर्ण समर्पण, कुलधर्म का संरक्षण, और तीनों गुणों से अतीत होने का अर्जुन-प्रश्न। 3.16 का संदेश बहुत स्पष्ट है: जो इस जगत में स्थापित सृष्टिचक्र के अनुसार अपना कर्तव्य नहीं निभाता, वह इन्द्रियों में रमने वाला और व्यर्थ जीवन जीने वाला माना गया है।

यह episode उन लोगों के लिए है जो duty, surrender और self-transcendence को एक साथ समझना चाहते हैं। 14.2 कहता है कि ज्ञान को आश्रय करके मम साधर्म्य प्राप्त पुरुष सृष्टि और प्रलय दोनों में अचंभित नहीं होते; 9.34 भगवान की भक्ति-परायण आज्ञा देता है; 1.41 धर्म के नाश से कुल में अधर्म के फैलाव की चेतावनी देता है; और 14.21 में अर्जुन पूछता है कि गुणों से अतीत पुरुष के लक्षण और आचरण क्या हैं।

इस वीडियो में आपको मिलेगा:

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  • Original 5 श्लोक with pronunciation, शब्दार्थ, भावार्थ

  • हर श्लोक के बाद छोटा interactive pause

  • पिछली video के अनुसार quiz with 4 options

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कमेंट करें:
"मेरा श्लोक = 3.16 / 14.02 / 9.34 / 1.4 / 14.21"
"आज मैंने किस जगह सृष्टिचक्र, समर्पण या गुणातीतता का अभ्यास किया?"

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