Day 70: परमधाम, दिव्य शंखनाद और योगसिद्धि | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series
आज के Day 70 में 5 अत्यंत दिव्य श्लोक हैं—जिस धाम में जाकर फिर लौटना नहीं, अर्जुन-कृष्ण का दिव्य शंखनाद, प्रयत्नपूर्वक अभ्यास से परमगति, अच्युत से क्षमायाचना, और भगवान की महिमा का ऋषि-परम्परा से प्रमाण। 15.6 में भगवान कहते हैं कि जिस परमपद को प्राप्त होकर मनुष्य लौटते नहीं, उसे न सूर्य, न चन्द्रमा, न अग्नि प्रकाशित कर सकते हैं; वही उनका परमधाम है।
यह episode उन साधकों के लिए है जो ultimate goal, surrender और spiritual progress को एक साथ समझना चाहते हैं। 6.45 यह आशा देता है कि प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करने वाला योगी, पिछले अनेक जन्मों के संस्कार बल से, शुद्ध होकर परमगति प्राप्त करता है। 11.42 में अर्जुन भगवान से विनम्र क्षमा माँगते हैं, और 10.13 में ऋषि, देवर्षि, व्यास और स्वयं भगवान की महिमा का एक स्वर सुनाई देता है।
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"मेरा श्लोक = 15.6 / 1.14 / 6.45 / 11.42 / 10.13"
"आज मैंने किस जगह परमधाम, अभ्यास या क्षमा का अभ्यास किया?"
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