Day 83 Script | भय, इन्द्रिय-संघर्ष, अभ्यासयोग और परम लाभ
आज के 5 श्लोक बहुत cinematic भी हैं और बहुत practical भी। 2.35 में लोक-अपमान और कर्तव्य, 2.60 में इन्द्रियों की प्रचंड शक्ति, 12.9 में अभ्यासयोग, 6.22 में परमात्मा-प्राप्ति का सर्वोच्च लाभ, और 11.17 में विश्वरूप का असह्य तेज सामने आता है।
Description
Day 83 में आप जानेंगे कि युद्ध से हटना क्यों अर्जुन के लिए अपयश का कारण बनता, क्यों इन्द्रियाँ बुद्धिमान का भी मन बलपूर्वक हर सकती हैं, क्यों अभ्यास spiritual life का practical रास्ता है, और क्यों परमात्मा-प्राप्ति के बाद उससे बड़ा कोई लाभ नहीं रहता। 11.17 में अर्जुन भगवान को मुकुट, गदा, चक्रधारी, सर्वतोदीप्त और अग्नि-सूर्य समान तेजस्वी रूप में देखते हैं।
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