Day 104 | 5 Shlok Per Day | जितात्मा, त्याग और भगवान की पोषण-शक्ति
आज के 5 श्लोक inner calm, true renunciation, and divine support को एक साथ जोड़ते हैं। 6.7 बताता है कि जो मनुष्य शीत-उष्ण, सुख-दुःख, मान-अपमान में सम रहता है, उसके ज्ञान में परमात्मा अच्छी तरह स्थित है।
Description
Day 104 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: जितात्मा और प्रशान्त पुरुष में परमात्मा का सम्यक् स्थित होना (6.7), काम्य कर्मों के त्याग और फलत्याग का भेद (18.2), कर्म-फल-त्यागी ही सच्चा त्यागी है (18.11), योगाश्रित होकर भी यदि साधन कठिन लगे तो फलत्याग की साधना (12.11 tradition), और पृथ्वी में प्रवेश करके सब भूतों को धारण करने तथा ओषधियों को पुष्ट करने वाली भगवान की शक्ति (15.13)। यह episode Jagat Ka Saar को equanimity, surrender, practicality और divine nourishment के साथ जोड़ता है।
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