Day 112 | 5 Shlok Per Day | आत्मा अवध्य है, सात्त्विक बुद्धि, और अभ्यासजन्य सुख
आज के 5 श्लोक बताते हैं कि आत्मा नित्य अवध्य है, अर्जुन की व्याकुलता मन की उलझन है, सात्त्विक बुद्धि प्रवृत्ति-निवृत्ति और बन्ध-मोक्ष को यथार्थ जानती है, और अभ्यास से मिलने वाला सुख दुःखों का अन्त करता है। 2.30 में श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं कि आत्मा के लिए शोक करना उचित नहीं है, जबकि 18.36 साधना से मिलने वाले त्रिविध सुख की ओर संकेत करता है।
Description
Day 112 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: शरीरों में स्थित आत्मा का अवध्य होना (2.30), अर्जुन की मनोदशा और गाण्डीव का हाथ से गिरना (1.3), प्रवृत्ति-निवृत्ति, कर्तव्य-अकर्तव्य, भय-अभय और बन्ध-मोक्ष को जानने वाली सात्त्विक बुद्धि (18.3), भगवान के प्रिय कर्मकर्ता की सर्वोच्चता (18.69), और भजन-ध्यान-सेवा के अभ्यास से मिलने वाला त्रिविध सुख (18.36)। यह episode Jagat Ka Saar को non-attachment, clarity, devotion और practice के साथ जोड़ता है।
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