Day 115 | 5 Shlok Per Day | दिव्य विभूति, राजविद्या, अंश-जीव, और इन्द्रिय-निग्रह
Day 115 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: भगवान की समस्त लोकों में व्याप्त दिव्य विभूतियाँ (10.16), ब्रह्म, अमृत, शाश्वत धर्म और ऐकान्तिक सुख का आश्रय भगवान (14.27), विज्ञानसहित राजविद्या का अत्युत्तम और सरल स्वरूप (9.2), जीवात्मा का भगवान का सनातन अंश होना (15.7), और संकल्पों से जन्मी कामनाओं को त्यागकर इन्द्रिय-निग्रह की साधना (6.24)। यह episode Jagat Ka Saar को presence, knowledge, identity, and restraint के साथ जोड़ता है।
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