Day 116 | 5 Shlok Per Day | ब्रह्मस्थिति, यज्ञ-कर्म, दिव्य विभूति और विषय-चक्र



आज के 5 श्लोक ब्रह्मनिर्वाण की स्थिर अवस्था, आसक्ति-रहित यज्ञकर्म, भगवान की अनंत विभूतियाँ, ज्ञानाग्नि से भस्म हुए कर्म, और विषय-चिन्तन से जन्मे क्रोध-चक्र को एक साथ रखते हैं। 2.72 ब्राह्मी स्थिति को final realization की तरह प्रस्तुत करता है, जबकि 2.62 दिखाता है कि विषय-चिन्तन कैसे आसक्ति, काम और क्रोध में बदल जाता है।

Description

Day 116 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: ब्राह्मी स्थिति में स्थिर योगी का ब्रह्मनिर्वाण (2.72), आसक्ति-मुक्त और ज्ञानावस्थित चित्त से यज्ञार्थ कर्म (4.23), भगवान की दिव्य विभूतियों के अनंत विस्तार का प्रारम्भिक वर्णन (10.19), काम-संकल्प-रहित और ज्ञानाग्निदग्ध कर्मों वाले पंडित की परिभाषा (4.19), और विषय-चिन्तन से क्रोध तक गिरने वाला मनोवैज्ञानिक क्रम (2.62)। यह episode Jagat Ka Saar को liberation, selfless action, divine vastness, wisdom and mind-control के साथ जोड़ता है।

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