Day 118 | 5 Shlok Per Day | विराट दर्शन से शान्ति, आत्मा का आश्चर्य, और निरन्तर भगवदर्पण



आज के 5 श्लोक अर्जुन के विराट रूप-भय, आत्मा की अद्भुत दुरूहता, स्थितप्रज्ञ के लक्षण, और सब कर्मों को भगवान में अर्पित करने की साधना को एक साथ रखते हैं। 11.51 में अर्जुन फिर से कृष्ण के सौम्य मानव-रूप को देखकर स्थिर चित्त हो जाता है, जबकि 18.57 मन-बुद्धि से निरन्तर भगवदर्पण का सीधा मार्ग देता है।

Description

Day 118 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: सौम्य मानव-रूप के दर्शन से अर्जुन की शान्ति की वापसी (11.51), स्थितप्रज्ञ के व्यवहार पर अर्जुन का प्रश्न (2.54), आत्मा को आश्चर्य की तरह देखने-सुनने-जानने की कठिनता (2.29), विराट रूप देखकर भयभीत अन्तःकरण की व्यथा (11.24), और समबुद्धियोग के साथ सब कर्मों का भगवान में निरन्तर अर्पण (18.57)। यह episode Jagat Ka Saar को awe, self-knowledge, equanimity, and surrender के साथ जोड़ता है।

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