Day 90 | 5 Shlok Per Day | विराट रूप, आत्मज्ञान और सत्कर्म | हर हर गीता, हर घर गीता | जगत का सार



आज के श्लोक विराट दर्शन, आत्मा की अविनाशिता, इन्द्रिय-मन-बुद्धि-आत्मा की श्रेणी, और सत् भाव से किए गए कर्म का सुंदर संगम हैं। 11.22 में समस्त देव-समूह विस्मित होकर भगवान को देखते हैं, जबकि 2.21 आत्मा की नित्य-अविनाशी प्रकृति स्पष्ट करता है।

Description

Day 90 में 5 Shlok Per Day के साथ हर हर गीता, हर घर गीता mission को आगे बढ़ाइए: विराट रूप को देखकर रुद्र, आदित्य, वसु आदि का विस्मय (11.22), आत्मा की अविनाशिता (2.21), दिव्य विराट रूप का दर्शन (11.11), इन्द्रिय-मन-बुद्धि-आत्मा का सूक्ष्म क्रम (3.42), और यज्ञ-तप-दान तथा तदर्थ कर्म का “सत्” स्वरूप (17.27)। यह episode Jagat Ka Saar को cosmic vision और inner discipline के साथ जोड़ता है।

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