Day 92 | 5 Shlok Per Day | प्रकृति-गुण, ब्रह्मस्थिति और ब्रह्मनिर्वाण | हर हर गीता, हर घर गीता | जगत का सार
आज के 5 श्लोक बताते हैं कि जीव गुणों के संग से बंधता है, रजोगुण उसे कर्म और फल की आसक्ति-जाल में बाँधता है, और स्थिरबुद्धि साधक प्रिय-अप्रिय में सम रहकर ब्रह्म में स्थित होता है। 13.21 का मुख्य बिंदु यह है कि प्रकृति से उत्पन्न गुणों का संग ही जीव के अच्छे-बुरे जन्मों का कारण बनता है।
Description
Day 92 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: प्रकृति-स्थित पुरुष और गुण-संग का बंधन (13.21), प्रिय-अप्रिय में सम रहने वाला ब्रह्मवेत्ता (5.20), आत्मरति-आत्मतृप्त अवस्था (3.17), रजोगुण का कर्मासक्ति से बंधन (14.7), और संशयरहित, सर्वभूतहिते रत ऋषियों का ब्रह्मनिर्वाण (5.25)। यह episode Jagat Ka Saar को inner mastery, detachment और universal compassion के साथ जोड़ता है।
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